एक कमजोर / निरीह / जली हुई
झोपडी के सामने बैठे
भोले भाले / नंग धडंग
गाँव की मिटटी और अपनी राख मे लिपटे,
ऐ मासूम बच्चे !
अब तुम क्या देख रहे हो?
तुम्हारे माँ-बाप और दादा दादी
तुम्हारे सामने ही पड़े हैं, लेकिन
तुम्हारी निर्दोष आँखों में कोई
भाव क्यों नहीं है.
ऐ भविष्य के निर्माता
क्या तुम कोई शपथ ले रहे हो
मन ही मन / या की
अपने नियंताओं के प्रती अपने
आक्रोश को फूटने देने के सपने संजो रहे हो ?
लेकिन तुम क्या जानते हो
ऐ मेरे असम के भोले भाले बच्चे !
के / आज निर्गुट सम्मलेन मे शामिल सभी देखों के गाँवो में
तुम्हारी तरह / आधे मिटटी आधे राख मे सने /
ना जाने कितने निरीह मासूम बच्चे /
दूसरों के बोये को काट रहे हैं / और /
तुमहारी ही तरह / अपनी जलती हुई झोपडी के सामने बैठे /
ना जाने क्या बडबडाते हुए, शपथ ले रहे हैं.
क्या तुम बताओगे / उनकी तुम्हारी
गर्म हवा में प्रवाहित होती -शपथ
ऐ मेरे नंग धडंग / निरीह / कमजोर / मासूम
निर्दोष बच्चे