एक साल से अहसास कराया जा रहा था की अब तुम सम्बन्ध बना लो वरना रिटायर हो जाने के बाद कोई नहीं पूछेगा | इस शब्द को जबरदस्ती मेरी आत्मा में बहुत गहरे तक उतारदिया गया था , क़ि अब तुम किसी भी बात को नकारने के काबिल नही हो | रिटायर होना भी अपने आप में एक घटना ही है जो होना ही है | सेवानिव्रतहोना कोई पाप नही है लेकिन तुम सेवानिव्रत हो रहे हो इसलिए जो कहा जाये सीधे -सीधे करते जायो बिना चू चपड किये कार्यालय मेरा जाना मजबूरी थी सो जाता रहा और हर रोज उनके मन क़ि करता रहा मन -बेमन से |
आदेश तो ये था क़ि उपार्जित अवकाश पर जायो या चिकित्सा अवकाश पर ,उन दिनों क़ी चाय रोज आकर पिलाओ या जब आओ तुब पिलाना ,दिउ रहेगी |जुलाई २००७ को मेरा स्थान्त्र्ण ललितपुर हो गया था | साथिओं ने मिल कर मुख्य अभियंता से निवेदन कर झाँसी में ही रुकवा लिया था _ खंड मिला वर्तमान कार्यालय |अन्य खण्डों से काफी हद तक अलग था लोंगों की बातें थी , चुहुलबाजी थी ,हंसी थी, मजाक ,हर किसी का दर्द था,मुह से भले कोई कुछ न कहे दर्द तो हरेक चेहरे से साफ़ झलकता था -सूखा डिविजन जो था (कुछ अपवाद भी थे )| रोज चाय आती सब मिल कर पीते -मिठाई आती सब मिल कर खाते -यह यहाँ की विशेषता थी | दूसरे कार्यालयों में दो चाय मंगा कर पीते और बाकी सब देखते | यह इस पर भी निर्भर करता की मंगा कौन रहा है| अगर कोई ठेकेदार मंगातातो सभी पीते अन्यथा जो मंगाता ,उसकी मर्जी होती किसे मिले -किसे नहीं |राज्य सरकार के कार्यालाओं में सबसे ज्यादा खपत चाय की होती है |
हर कोई अपनी जेब ढीली नहीं करना चाहता -नजर दूसरेकी जेब पर रहती -मेरी जेउसकीजेब से छोटी है| यह फार्मूला हमेशा हवा में तेरा करता | रामप्रसाद जेसे ही कार्यालय प्रवेश करता लोंगो की आखों में चाय के सपने तेरने लगते |उनका मानना था कि उसकी जेब सबसे भारी है | , . बच्चों की शादी हो गई है, लड़का अच्छी जगह नौकरी कर रहा है -दामाद भी अच्छी कमाई कर रहा है पत्नी घर में कपड़ों की कारखाना खोले हुए है पेसे की क्या कमी -जिम्मेदारी है नहीं सब सुर में सुर मिलाते,आख़िरकार रो झींक करउसे चाय मंगानी पड़ती
पांडे की फितरत थी केसे भी रामप्रसाद कीजेब खाली कराई जाय .. सुबह होते ही चाय आती –सभी पीते और अगली बार के लिए फिर तैयार हो जाते | चाय और लोग भी मंगाते लेकिन एसा कम ही होता .सभी को रामप्रसाद की चाय में जायदा दिलचस्पी होती कईबार चिक-२ भी होती एक दूसरे को भला बुरा भी कहा जाता| अगर रामप्रसाद की चाय आती तो सभी चेहरे खिल जाते | "प्रसाद चाय पिलाओ:"- इक़बाल कहता | " नहीं अभी तो घर से आ रहे हो " | "बहुत देर हो गई है " पेसे नहीं है तो क्या हुआ उधार ले लो "|"उधार वुधार नहीं "| चलो आज मैं पिला देता हूँ ,कल तुम पिला देना "| यार ,दस रूपए देना -बाजपेई "| शर्माजी , दस तुम भी दो , पांच मेरे पास है " इस तरह चाय आती और सभी चाय का आन्नद लेते | पांडे एक दिन रामप्रसाद से बोला -"चाय पिलाओ”"तुमपिलाओ"-जवाब मिला |"”चलो पर्ची दाल लें "|
एक सुर मैं समर्थन मिलाऔर पर्ची डाली गई जितने लोग उतनी पर्ची | पर्चियों मेंलिखा गया -दोनों हाथों में मुड़ी -तुड़ी को हिलाया और रामेश्वर ने पर्चियोंको मेज पर दाल दी -सबने एक-एक पर्ची उठा लीं -दूर से दिखाई- "खाली ". " रत्ना बोली | मेरी भी "-कमल बोला | मेरी भी खाली है समीर ने क मेरी भी" होती | सभी ने पर्ची फाड़ दीं, सब ने देख लीं हों | पर्ची पर नाम रामप्रसाद का आया | सभी ने किलकारी मारी – रामप्रसाद ने पेसे दिए , चाय आई और सबने शौक से पी| इस मामले में वह अकेला होता और सारे एक तरफ कोई कभी भी रामप्रसाद की तरफ नहीं बोलता इस इकलौते मामले में |हर रोज यही वाक्या दोहराया जाता |हरेक की कोशिश होती -चाय के लिए रामप्रसाद ही अपनी जेब ढीली करे मन से, बेमन से |इसमामले में इस कदर दवाब बनाया जाता कि उसे रोकर -झिंक कर चाय मंगानी पड़ती और लोग मजे लेते | इन्क्रीमेंट लगता तो सभी एक-एक कर मिठाई मंगाते यह नियम था लेकिन अच्य के लिए अकेला रामप्रसाद पंजीक्रत था|
" यार चाय मंगाओ" "पेसे नहीं हें तुम ही क्यों नहीं मंगाते?”“ तुम्हारा एक एरियर है| " "तो क्या हुआ ? '"चाय तो बनती है नहीं बनती,एरियर क्या मेरा अकेले का है| "नहीं मंगाओगे?" “नहीं” " अच्छा?" हाँ क्या कर लोगे ?" |"नहीं मंगाओगे?" नहीं " अच्छा ?" हाँ क्या कर लोगे ?" " यार तुम तो बुरा मान गए रामप्रसाद उठ कर चलने लगा | सीबीई से रेड डलवा देंगें""अच्छा?” ". इन्कम टेक्स किभी रेड डलवा दी जाएगी ? "फिर " " मेरी टोपी कहाँगई यहीं तो रक्खी थी "म मिल जायेगी अगर कुछ हो जाये ""क्या?"चाय मंगवा दो फिर देखेगे क्याहो सकता है | अच्छा नहीं मंगवाऊ तो? " टोपी खोई ही रहेगी '" पहले टोपी " " नहीं पहले चाय "| ये चुहुलबाजी चल ही रही थीकिकोई बोला -"तुम्हरा चश्मा कहाँ है ?" "अच्छा वो भी गया " "हाँ "" साले तुम्हारी ही करतूत है" "मैं तुम्हारे पास आया ही नहीं "| "अगर कोई चीज आफिस में या बाहरकहीं भी खोयगी तो तुम्हारा ही नाम आएगा | "अच्छा केसे? " "तुम्हारे आदमी चारों ओर हें |" अच्छा बहुत हो गया ये लो बीस रूपये चाय मंगाओ|" चारों ओर शांति छा गई ,कुछ मिनटों के लिए | इतनी देर तक क्यों खोपड़ी खा रहे थे |" '"जानते हो मेरी आदत मैं तो वेसे हीचाय मँगाने वाला था अगर कोई टोक दे फिर चाय का सपना अपने आप चूर-चूर हो जाता है|" रामप्रसाद रिटायर हो चुका था|कुछ दिनों तक तो मामला शांत रहा फिर वही चाय की मांग होने लगी -"चपरासी बुलाएँ " -------समाप्त --------
Date-22-1-2011