भाई साहब ,
देखो ये मार रहा है ,
भाई साहब देखो इसने फिर मार दिया ,
आपको कबसे सबूत दिए जा रहे है ,
फिर भी आपने कुछ नहीं किया हमारे लिए ,
सबूत इसे भी देते फिर रहे है कबसे ,
ये है की मानता नहीं ,मुंबई बम कांड ,संसद पर हमले ,सबूत और भी न जाने कितने ,
सबूतों की टोकरी लिए हम घूम रहे है मारे मारे - सबूत ले लो सबूत ,
फिर भी ये हमारे सबूतों पर मन ही मन हस्त है - मुस्कुराते तो आप भी है .
आप भी भाई साहब !
आप की हर ख़ुशी मैं आनंदित हो नाचने लगते है - लादेन आपने मारा और खुश हम हुए ,
ऐसे जैसे हमारा ही कारनामा हो .
हम आपका इतना ख्याल रखते है और आप .....
माना की हम आप पर आश्रित है ,
फिर भी जब देखो तब मार देता है थप्पर ,
और हम गाल सहलाते रहे जाते है - इस आशा मैं की आप कुछ कहोगे .
अब क्या कहे ! जाइये हम आपसे नहीं बोलते .
आप कहें न कहें उसे कुछ , हम जरूर हमेशा बात करने के इक्छुक रहते हैं -
भले ही कितनी बार धमक दे हमें .
गुहार हम आप से लगते ही रहेंगे - गुहार हम .......
05/06/11
No comments:
Post a Comment