Sunday, August 28, 2011

गुहार माई बाप

भाई साहब ,

देखो ये मार रहा है ,

भाई साहब देखो इसने फिर मार दिया ,

आपको कबसे सबूत दिए जा रहे है ,

फिर भी आपने कुछ नहीं किया हमारे लिए ,

सबूत इसे भी देते फिर रहे है कबसे ,

ये है की मानता नहीं ,मुंबई बम कांड ,संसद पर हमले ,सबूत और भी न जाने कितने ,

सबूतों की टोकरी लिए हम घूम रहे है मारे मारे - सबूत ले लो सबूत ,

फिर भी ये हमारे सबूतों पर मन ही मन हस्त है - मुस्कुराते तो आप भी है .

आप भी भाई साहब !

आप की हर ख़ुशी मैं आनंदित हो नाचने लगते है - लादेन आपने मारा और खुश हम हुए ,

ऐसे जैसे हमारा ही कारनामा हो .

हम आपका इतना ख्याल रखते है और आप .....

माना की हम आप पर आश्रित है ,

फिर भी जब देखो तब मार देता है थप्पर ,

और हम गाल सहलाते रहे जाते है - इस आशा मैं की आप कुछ कहोगे .

अब क्या कहे ! जाइये हम आपसे नहीं बोलते .

आप कहें न कहें उसे कुछ , हम जरूर हमेशा बात करने के इक्छुक रहते हैं -

भले ही कितनी बार धमक दे हमें .

गुहार हम आप से लगते ही रहेंगे - गुहार हम .......

05/06/11

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