ढाक के तीन पात अपने आप में अनोखी अनूठी व्यंग रचना है l और सब खैरियत है श्रीमान l इस व्यंग को पढ़ना ही अनोखा अनुभव एवं रोमांचकारी है l सभी पात्रों को पूरी तन्मयता से उभारा और उनका अंत किया गया है -रागदरबारी के बाद दूसरी मेरी पसंद की रचना है -श्री मलय जैन को बधाई l और सब खैरियत श्रीमान