Monday, July 25, 2016

ढाक  के तीन पात अपने आप में अनोखी अनूठी व्यंग रचना है l और सब खैरियत है श्रीमान l इस व्यंग को पढ़ना ही अनोखा अनुभव एवं  रोमांचकारी है l सभी पात्रों  को पूरी तन्मयता से उभारा और उनका अंत किया गया  है -रागदरबारी के बाद दूसरी मेरी पसंद की रचना है -श्री मलय जैन को बधाई l और सब खैरियत श्रीमान  

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