देश भक्ति पटाक्षेप हो गया है _… । अब जबकि हम स्वतंत्र विकसित देशवासी है , देशभक्ति का पटाक्षेप हो गया है ,देशभक्ति तो नेता का आश्वासन रह गया है -जो विभिन्न अवसरों पर अभिव्यक्त होता है ,एक छलावा दिवालियेपन का प्रतीक है ,और यह हमारे खोखलेपन का अहसास है -भिन्न -भिन्न अवसरों पर पुरानी यादों को छाती से चिपटाए रहने की मजबूरी को महसूसने की बेबसी और नया कुछ ना कर पाने की व्यथा …. १४-८-१९८३
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