Thursday, August 30, 2012

Monday, August 20, 2012

kya samjhe

desh ki istithi ko dekh kar aam aadmi samjh nhi pa rha hay ki kya kare,kya na kare

Thursday, July 12, 2012

bebsi

ghode si chal man ki, billii kiaakhonsi teji javani ki mang bharta budhaapaa,.garmike ub bhare dinonsa bitaate na bita.

Monday, March 26, 2012

Ab Phool Ki.......

- अब फूल की पंखड़ी खिली ,यौवन की हवा चली ,काले बादल मचले ,अब वर्षा चली -चली | मदमस्त मोर कूके ,लो सावन की झड़ी लगी ,आमों पर बौर खिली यौवन की अंगडाई चली -चली | सावन की घटा उड़ी,बादल के पर लगे ,स्वप्निल स्वप्न बिखरे धरा ने ली अंगड़ाई, धूप की तपन लगी लगी | पतझड़ का मौसम आया ,पेड़ों के पत्ते उड़े मानव मन उलझा,श्रम जल बहा-बहा |बसंत आया उल्लसित मन चंचल हो आया, बागों में कली चटकी,फूलों पर भंवरा आया , सुमधुर मधु बहा- बहा |दिन हवा हुए धूप रंगीली दुपहरी सिसकी शाम चली-चली |रात उठी हवाएं बहकी तरंगें खिची ,तृप्ति हो चली -चली |गुलाबी नयनों में स्वप्न तिरे मुस्कराहट सजी प्रेम पगे तीर चले मनभावन गीतों का गुंजन हुआ -हुआ | काम तृषित गहने महके ,बंद आखें मुस्कराई सरस मन हर्षित हुए ,यौवन की मदमस्त जवानी खुली-खुली | छवि के वसंत गुलाब खिले, बिन पिया के पपीहा बोला कोयल ने क्यों शांत वन में गाया बिरही आँसू बहे- बहे |

Friday, March 16, 2012

aurt tum kitni mahaan ho....

aourt tum kitni mahaan ho ,galiij,nikrshttum purush ke liye bhi tumaahrinaak par kapdanahin hota.aourat! purush ki gandgi jhalti ,kathortum aashtake dharaatal ko bhadti tumahri mamtwa ki vina jhankrt hoti hay baar-baar prtarit hoti tum! .aourt!tum kuch bhi ho tumahre putr pati ke kunthit vyavhar ke baavjood jiivant hay tumahara matrtv -ptitv.

Friday, January 27, 2012

चलती बिरिया

एक साल से अहसास कराया जा रहा था की अब तुम सम्बन्ध बना लो वरना रिटायर हो जाने के बाद कोई नहीं पूछेगा | इस शब्द को जबरदस्ती मेरी आत्मा में बहुत गहरे तक उतारदिया गया था , क़ि अब तुम किसी भी बात को नकारने के काबिल नही हो | रिटायर होना भी अपने आप में एक घटना ही है जो होना ही है | सेवानिव्रतहोना कोई पाप नही है लेकिन तुम सेवानिव्रत हो रहे हो इसलिए जो कहा जाये सीधे -सीधे करते जायो बिना चू चपड किये कार्यालय मेरा जाना मजबूरी थी सो जाता रहा और हर रोज उनके मन क़ि करता रहा मन -बेमन से |

आदेश तो ये था क़ि उपार्जित अवकाश पर जायो या चिकित्सा अवकाश पर ,उन दिनों क़ी चाय रोज आकर पिलाओ या जब आओ तुब पिलाना ,दिउ रहेगी |जुलाई २००७ को मेरा स्थान्त्र्ण ललितपुर हो गया था | साथिओं ने मिल कर मुख्य अभियंता से निवेदन कर झाँसी में ही रुकवा लिया था _ खंड मिला वर्तमान कार्यालय |अन्य खण्डों से काफी हद तक अलग था लोंगों की बातें थी , चुहुलबाजी थी ,हंसी थी, मजाक ,हर किसी का दर्द था,मुह से भले कोई कुछ न कहे दर्द तो हरेक चेहरे से साफ़ झलकता था -सूखा डिविजन जो था (कुछ अपवाद भी थे )| रोज चाय आती सब मिल कर पीते -मिठाई आती सब मिल कर खाते -यह यहाँ की विशेषता थी | दूसरे कार्यालयों में दो चाय मंगा कर पीते और बाकी सब देखते | यह इस पर भी निर्भर करता की मंगा कौन रहा है| अगर कोई ठेकेदार मंगातातो सभी पीते अन्यथा जो मंगाता ,उसकी मर्जी होती किसे मिले -किसे नहीं |राज्य सरकार के कार्यालाओं में सबसे ज्यादा खपत चाय की होती है |
हर कोई अपनी जेब ढीली नहीं करना चाहता -नजर दूसरेकी जेब पर रहती -मेरी जेउसकीजेब से छोटी है| यह फार्मूला हमेशा हवा में तेरा करता | रामप्रसाद जेसे ही कार्यालय प्रवेश करता लोंगो की आखों में चाय के सपने तेरने लगते |उनका मानना था कि उसकी जेब सबसे भारी है | , . बच्चों की शादी हो गई है, लड़का अच्छी जगह नौकरी कर रहा है -दामाद भी अच्छी कमाई कर रहा है पत्नी घर में कपड़ों की कारखाना खोले हुए है पेसे की क्या कमी -जिम्मेदारी है नहीं सब सुर में सुर मिलाते,आख़िरकार रो झींक करउसे चाय मंगानी पड़ती

पांडे की फितरत थी केसे भी रामप्रसाद कीजेब खाली कराई जाय .. सुबह होते ही चाय आती –सभी पीते और अगली बार के लिए फिर तैयार हो जाते | चाय और लोग भी मंगाते लेकिन एसा कम ही होता .सभी को रामप्रसाद की चाय में जायदा दिलचस्पी होती कईबार चिक-२ भी होती एक दूसरे को भला बुरा भी कहा जाता| अगर रामप्रसाद की चाय आती तो सभी चेहरे खिल जाते | "प्रसाद चाय पिलाओ:"- इक़बाल कहता | " नहीं अभी तो घर से आ रहे हो " | "बहुत देर हो गई है " पेसे नहीं है तो क्या हुआ उधार ले लो "|"उधार वुधार नहीं "| चलो आज मैं पिला देता हूँ ,कल तुम पिला देना "| यार ,दस रूपए देना -बाजपेई "| शर्माजी , दस तुम भी दो , पांच मेरे पास है " इस तरह चाय आती और सभी चाय का आन्नद लेते | पांडे एक दिन रामप्रसाद से बोला -"चाय पिलाओ”"तुमपिलाओ"-जवाब मिला |"”चलो पर्ची दाल लें "|
एक सुर मैं समर्थन मिलाऔर पर्ची डाली गई जितने लोग उतनी पर्ची | पर्चियों मेंलिखा गया -दोनों हाथों में मुड़ी -तुड़ी को हिलाया और रामेश्वर ने पर्चियोंको मेज पर दाल दी -सबने एक-एक पर्ची उठा लीं -दूर से दिखाई- "खाली ". " रत्ना बोली | मेरी भी "-कमल बोला | मेरी भी खाली है समीर ने क मेरी भी" होती | सभी ने पर्ची फाड़ दीं, सब ने देख लीं हों | पर्ची पर नाम रामप्रसाद का आया | सभी ने किलकारी मारी – रामप्रसाद ने पेसे दिए , चाय आई और सबने शौक से पी| इस मामले में वह अकेला होता और सारे एक तरफ कोई कभी भी रामप्रसाद की तरफ नहीं बोलता इस इकलौते मामले में |हर रोज यही वाक्या दोहराया जाता |हरेक की कोशिश होती -चाय के लिए रामप्रसाद ही अपनी जेब ढीली करे मन से, बेमन से |इसमामले में इस कदर दवाब बनाया जाता कि उसे रोकर -झिंक कर चाय मंगानी पड़ती और लोग मजे लेते | इन्क्रीमेंट लगता तो सभी एक-एक कर मिठाई मंगाते यह नियम था लेकिन अच्य के लिए अकेला रामप्रसाद पंजीक्रत था|

" यार चाय मंगाओ" "पेसे नहीं हें तुम ही क्यों नहीं मंगाते?”“ तुम्हारा एक एरियर है| " "तो क्या हुआ ? '"चाय तो बनती है नहीं बनती,एरियर क्या मेरा अकेले का है| "नहीं मंगाओगे?" “नहीं” " अच्छा?" हाँ क्या कर लोगे ?" |"नहीं मंगाओगे?" नहीं " अच्छा ?" हाँ क्या कर लोगे ?" " यार तुम तो बुरा मान गए रामप्रसाद उठ कर चलने लगा | सीबीई से रेड डलवा देंगें""अच्छा?” ". इन्कम टेक्स किभी रेड डलवा दी जाएगी ? "फिर " " मेरी टोपी कहाँगई यहीं तो रक्खी थी "म मिल जायेगी अगर कुछ हो जाये ""क्या?"चाय मंगवा दो फिर देखेगे क्याहो सकता है | अच्छा नहीं मंगवाऊ तो? " टोपी खोई ही रहेगी '" पहले टोपी " " नहीं पहले चाय "| ये चुहुलबाजी चल ही रही थीकिकोई बोला -"तुम्हरा चश्मा कहाँ है ?" "अच्छा वो भी गया " "हाँ "" साले तुम्हारी ही करतूत है" "मैं तुम्हारे पास आया ही नहीं "| "अगर कोई चीज आफिस में या बाहरकहीं भी खोयगी तो तुम्हारा ही नाम आएगा | "अच्छा केसे? " "तुम्हारे आदमी चारों ओर हें |" अच्छा बहुत हो गया ये लो बीस रूपये चाय मंगाओ|" चारों ओर शांति छा गई ,कुछ मिनटों के लिए | इतनी देर तक क्यों खोपड़ी खा रहे थे |" '"जानते हो मेरी आदत मैं तो वेसे हीचाय मँगाने वाला था अगर कोई टोक दे फिर चाय का सपना अपने आप चूर-चूर हो जाता है|" रामप्रसाद रिटायर हो चुका था|कुछ दिनों तक तो मामला शांत रहा फिर वही चाय की मांग होने लगी -"चपरासी बुलाएँ " -------समाप्त --------
Date-22-1-2011

Sunday, August 28, 2011

गुहार माई बाप

भाई साहब ,

देखो ये मार रहा है ,

भाई साहब देखो इसने फिर मार दिया ,

आपको कबसे सबूत दिए जा रहे है ,

फिर भी आपने कुछ नहीं किया हमारे लिए ,

सबूत इसे भी देते फिर रहे है कबसे ,

ये है की मानता नहीं ,मुंबई बम कांड ,संसद पर हमले ,सबूत और भी न जाने कितने ,

सबूतों की टोकरी लिए हम घूम रहे है मारे मारे - सबूत ले लो सबूत ,

फिर भी ये हमारे सबूतों पर मन ही मन हस्त है - मुस्कुराते तो आप भी है .

आप भी भाई साहब !

आप की हर ख़ुशी मैं आनंदित हो नाचने लगते है - लादेन आपने मारा और खुश हम हुए ,

ऐसे जैसे हमारा ही कारनामा हो .

हम आपका इतना ख्याल रखते है और आप .....

माना की हम आप पर आश्रित है ,

फिर भी जब देखो तब मार देता है थप्पर ,

और हम गाल सहलाते रहे जाते है - इस आशा मैं की आप कुछ कहोगे .

अब क्या कहे ! जाइये हम आपसे नहीं बोलते .

आप कहें न कहें उसे कुछ , हम जरूर हमेशा बात करने के इक्छुक रहते हैं -

भले ही कितनी बार धमक दे हमें .

गुहार हम आप से लगते ही रहेंगे - गुहार हम .......

05/06/11