Sunday, October 18, 2015

लगता है तथाकथित सम्मान छोड़ू लेखक श्री अरुण शोरी को भूल गए जब उनके चेहरे पर कालिख पोती गई तब कानों पर जूं तक  नहीं रेंगी थी !  अपने को प्रगतिशील कहने वाले ये लेखक केवल  मुस्लिमों प्रवक्ता हैं उनकी कोई भी बात मुस्लिमों से शुरू होती है और वहीं से समाप्त होती है l इन्हे ईसाई सिखों आदि से कोई मतलब नही इनकी निष्ठा भी इस देश में नही मार्क्स मैं है l समय चक्र घूम रहा है तो तिलमिला रहे हैं देश में कोई भी कुत्ता,सांप छछूदर राज करे बीजेपी बर्दाश्त नही पेंसठ  साल से दौड़ता प्रगतिशील घोड़ा बूढ़ा हो गया है इसका अहसास नही है उन्हें  तभी अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं।   

Thursday, July 30, 2015

आपके घर में अगर काक्रोच आ  जाता है  तो आप क्या  करते हैं -मार  देते  हैं -फ़िल्मी डायलॉग  बोलने वाले  वास्तविक जिंदगी  में बौरा गए।  कुछ लोग  पाल लेतें हैं। …।         

Thursday, March 5, 2015

आप सभी को होली  की शुभकामनायें 

Friday, February 27, 2015

आज कल मध्यम वर्ग पहचान  के घेरे में उलझ कर रह गया है -पैन कार्ड ,राशन कार्ड,वोटर कार्ड ,गैस कार्ड ,ड्राईविंग लाइसेन्स ,बैंक पासबुक ,आदि .... और  कितने

Monday, November 18, 2013

vidai

. सचिन तेंदुलकर की क्रिकेट  से विदाई बहुत लोगों को दुखी कर गई। देशी -विदेशी मिडिया ने  भी अपने तरीकों से उनका गुणगान किया जिसके वे हक़दार हैं। उन्हें भारत रत्न प्राप्त होने के लिए बधाई ! सबसे बड़ा उपहार उन्हें पहले सेही प्राप्त है -दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमिओं का प्यार !

Sunday, September 1, 2013

deshbhkti ka patachep ho gyaa hay

देश भक्ति पटाक्षेप हो गया है _… । अब जबकि हम स्वतंत्र विकसित देशवासी है , देशभक्ति का पटाक्षेप हो गया है ,देशभक्ति तो नेता का आश्वासन रह गया है -जो विभिन्न अवसरों पर अभिव्यक्त होता है ,एक छलावा दिवालियेपन का प्रतीक है ,और यह हमारे खोखलेपन का अहसास है -भिन्न -भिन्न अवसरों पर पुरानी यादों को छाती से चिपटाए रहने की मजबूरी को महसूसने की बेबसी और नया कुछ ना कर पाने की व्यथा …. १४-८-१९८३