लगता है तथाकथित सम्मान छोड़ू लेखक श्री अरुण शोरी को भूल गए जब उनके चेहरे पर कालिख पोती गई तब कानों पर जूं तक नहीं रेंगी थी ! अपने को प्रगतिशील कहने वाले ये लेखक केवल मुस्लिमों प्रवक्ता हैं उनकी कोई भी बात मुस्लिमों से शुरू होती है और वहीं से समाप्त होती है l इन्हे ईसाई सिखों आदि से कोई मतलब नही इनकी निष्ठा भी इस देश में नही मार्क्स मैं है l समय चक्र घूम रहा है तो तिलमिला रहे हैं देश में कोई भी कुत्ता,सांप छछूदर राज करे बीजेपी बर्दाश्त नही पेंसठ साल से दौड़ता प्रगतिशील घोड़ा बूढ़ा हो गया है इसका अहसास नही है उन्हें तभी अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं।
Sunday, October 18, 2015
Thursday, July 30, 2015
Wednesday, April 1, 2015
Friday, February 27, 2015
Monday, November 18, 2013
vidai
. सचिन तेंदुलकर की क्रिकेट से विदाई बहुत लोगों को दुखी कर गई। देशी -विदेशी मिडिया ने भी अपने तरीकों से उनका गुणगान किया जिसके वे हक़दार हैं। उन्हें भारत रत्न प्राप्त होने के लिए बधाई ! सबसे बड़ा उपहार उन्हें पहले सेही प्राप्त है -दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमिओं का प्यार !
Sunday, September 1, 2013
deshbhkti ka patachep ho gyaa hay
देश भक्ति पटाक्षेप हो गया है _… । अब जबकि हम स्वतंत्र विकसित देशवासी है , देशभक्ति का पटाक्षेप हो गया है ,देशभक्ति तो नेता का आश्वासन रह गया है -जो विभिन्न अवसरों पर अभिव्यक्त होता है ,एक छलावा दिवालियेपन का प्रतीक है ,और यह हमारे खोखलेपन का अहसास है -भिन्न -भिन्न अवसरों पर पुरानी यादों को छाती से चिपटाए रहने की मजबूरी को महसूसने की बेबसी और नया कुछ ना कर पाने की व्यथा …. १४-८-१९८३
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