एक मां अभिलाषा थी ,अपने बेटों को मेजर -कप्तान बनायेगी ,ईश्वर ने उसकी अभिलाषा पूर्ण की ,बड़ा बेटा सेना में था दुश्मनों की फौज से लड़ता हुआ मारा गया और शहीद हो गया . मां कलेजा ठंडा हुआ ,उसने मुहल्ले में खड़े होकर घोषणा की -तूने मेरी लाज रख ली ,तू धन्य है ! आँख से गंगा -जमुना बहने लगी -तो पड़ोसी ने पूछा- रोती क्यों है माँ ? तो तड़प कर बोली -तीसरा बेटा नही है ना . समय नहीं रूकता की ईश्वर ने उसकी अभिलाषा पूर्ण समय रंग दिखाया .कुछ समय बाद ,वही मां चीखती -चिल्लाती ,मुहल्ले के बीचों -बीच खड़ी विलाप करती ,अपनी छाती पीटती दिखाई दी .मोहल्ले -पड़ोस के लोंगों ने एक माँ की मर्मान्तक चीत्कार सुनी ,सुनते ही लोंगों का हुजूम इकठठा हो गया! एक मां चीत्कार रही थी -लगता था ,उसके सामने ही उसका बेटा मारा जा रहा हो ! किसी ने पुछा क्यों रो रही हो तो बोली , अरे कपूत तूने मेरी कोख में अंगारे भर दिए है मुझे तेरे शहीद होने का गम नही है ,दुःख इतना है की तेरी माँ तो पच्चीस हजार पाकर छुटकारा पा जाएगी लेकिन उस देशद्रोही -आतंकवादी को तो अगर ज़िंदा बच गया तो नौकरी ,एक लाख रूपये ,मारुती कर ,सुरकचा कमांडो ,लोकसभा राज्यसभा की सीट या जो भीउसकी शर्तें होंगी मानी जायेगी . तू तो चला गया मुझ अभागिन को छोड़ कर ,मुझे भी साथ लेता चल ,साथ लेता चल .......!
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