Wednesday, October 24, 2012

mithai

एक गाँव में एक साधू कई दिनोँ से आये हुए थे . दूर-दूर  से लोग उनकी कीर्ति सुन कर  दर्शन  करने आ रहे थे . श्रद्धालुओं  में सभी धर्मों के लोग थे . एक व्यक्ति  ने  एक कटोरे में साधू को प्रसाद दिया .साधू ने बड़े प्रेम से कटोरा लेकर बिना देखे प्रसाद खाना शुरू कर दिया . लोगों ने देखा साधू मास का कटोरा हाथ लिए बड़े प्रेम से हड्डी का मास काट कर खा रहे है . खाने के बाद उनोंहने  शिष्य से पानी माँगा . उनके शिष्य ने पूछा  गुरूजी आप ये तो कभी खाते नही फिर आज केसे खा लिया ? उस साधू ने मुस्करा कर कहा ," उसने मुझे प्रेम से कुछ खाने को दिया तो मैं उसके प्रेम को केसे नकार देता। " फिर उस व्यक्ति से बोले ,"मैंने तुम्हारा प्रसाद रसगुल्ला समझ कर खा लिया उसमे  मुझे रसगुल्ले का सुवाद आया आज से तुम और तुम्हारा परिवार जब भी ये खाद्य खायेगा उसे भी उसमे रसगुल्ले का सुवाद आएगा ."  तब से वह  शाकाहारी  हो गया है .तबसे ही बकरे की मां खेर मनाती है -मेरा एक बेटा तो बचा !

1 comment:

  1. Kanwarjis providing them with delicious Confectionery Items, we offer them with best product range. With our mission to provide Best Namkeen Products in Delhi and valuable service to our clients.

    ReplyDelete