देश भक्ति पटाक्षेप हो गया है _… । अब जबकि हम स्वतंत्र विकसित देशवासी है , देशभक्ति का पटाक्षेप हो गया है ,देशभक्ति तो नेता का आश्वासन रह गया है -जो विभिन्न अवसरों पर अभिव्यक्त होता है ,एक छलावा दिवालियेपन का प्रतीक है ,और यह हमारे खोखलेपन का अहसास है -भिन्न -भिन्न अवसरों पर पुरानी यादों को छाती से चिपटाए रहने की मजबूरी को महसूसने की बेबसी और नया कुछ ना कर पाने की व्यथा …. १४-८-१९८३
Sunday, September 1, 2013
Monday, August 19, 2013
नवयौवन ! ,तुम आ जाना ,सुनहरे सपनों के खातिर ,तुम नवपंखी हरित में उछाल भर ,गेहूं की बाली के जीवन सा /तुम / मत बिखर जाना ,ओ नवयौवन ! तुम तब आना जब अबोध बच्चे की भोली -भाली सूरत पर निर्मल हसीं हो ,उसे जीवन की काली चट्टानों, दरारों को देखने की छमता तो हो ,हो अगर समतल तल उस पर खड़े हो मुस्काना ,नवयौवन तुम … बिखरे ज्वारों के मध्य तुम आ जाना ढूढ़ तुम मोती लाना ,जो अगर ज्वार थम जाये ,रह तुम वहीं जाना नवयौवन तुम …. ऐ नवयौवन ! लम्बी -काली उबड़ -खाबड़ सड़क से आना ,तो ,आधुनिक जीवन को भूल वहीं आना, अगर हो सके तो अपनापन ले आना ,अरे नवयौवन ! तुम ऊची ,नीची ,छोटी -बड़ी घाटी जंगलों ,पत्थरों के सहारे पगडंडी से आना ,तो गाँव के द्वारे भोला -भाला मिटटी तले अधनंगा ,नाक बहाता धूप ,में खड़ा किसी की तलाश में आशा लगाये बच्चा मिल जाये ,उसे चूम जरूर आना चाहे तुम मत आना . ओ नवयोवन ,तुम स्कूल -कालेजों के मैदानों से आधुनिक परिसरों से होकर आना, तो तुम चाहे मत आना ,अगर आना तो एक सिर्फ एक भगतसिंह को उठा जरूर लाना . ओ नवयौवन तुम आ जाना . --------२-४-१९८०
Wednesday, July 24, 2013
modi viridh
मोदी विरोध में लोग ये तक भूल गये हैं कि वे कर क्या रहे हैं l इस कुकृत्य ने विभीषण और मीरजाफर की याद दिला दी lकोई इन से पूछे कि हमारे देश की समस्याओं और कमिओंको दूसरे देश को बताने का क्या अर्थ निकाला जाये l
Thursday, July 18, 2013
ishrat ke liye vilaap
,एसा लगता है कि हर कोई यही विलाप कर रहा है उसके साथ क्या हुआ l देश में जेसे हर कोई यह चाहता है कि किसी भी तरह से मोदी को फ़ांस लिया जाये तब सब कुछ सुधर जायेगा - सभी समस्याये समाप्त हो जाएगी
Wednesday, February 20, 2013
Thursday, December 20, 2012
gujrat main modi.......
गुजरात में श्री मोदी जी ने अपने विजयी उद्बोधन में कहा - गुजरात ऐसा बनाना चाहता हूँ सारे देश के युवक यहाँ आकर नौकरी करे यही देश की सबसे बड़ी सेवा है 1 इस सम्बन्ध में ठाकरे बंधुओं का क्या कहना है .......
Tuesday, November 20, 2012
probesan pr
शशी की शादी बड़ी धूम-धाम से राजेशसेहुई थी ! ससुराल वालों की तारीफ करते शशि के मम्मी पापा अघाते नही थे हरतीज -त्यौहारपर रस्म के अनुसार फल ,मिठाईकपड़ों आदिकी सौगात भेजते रहते थे i शशि के विवाह के समय पाँच लाख नकद ,कपडे ,गहने मोटरसाइकल ,बर्तन आदि का दहेज़ दिया गया था ! वह अपने सास ससुर की बहुत तारीफ करती थी और अपने पति के साथ खुश थी1 उसको ससुराल वालों से केवल एक ही शिकायत थी कि उसे घर क किसी मसले पर निर्णय का अधिकार नहीं था 1और न ही उसेक बात में शामिल किया जाता है बड़ी बहू होने पर भी हर निर्णय से दूर रखा जाता था शशि की एक लड़की थी !सास -ससुर अपनी पोती का बहुत ख्याल रखते थे धीरे -धीरे तीन साल बीत गए !लड़की अपने दादा -दादी के साथ हमेशा खेलती रहती थी वे भी जान छिडकते थे अपनी पोती पर ! शशि की सहेली आई हुई थीं !दोनों शोपिंग पर गई हुई थी !शशि ने सोचा सास ससुर अकेले है ,मिनी उन्हेंपरेशान कर रही होगी !जेसे ही वो घर में घुसी ,उसे सुनाई दिया -"और सब ठीक रहा बहू के घर से काफी दहेज आया ,किसी बात की कमी नही की उन्होंने "-सास कह रही थी !शशि थमक कर खड़ी हो गई !बात उसके बारे में ही हो रही थी ! "वो तो ठीक है ,अभी हमे चार साल और चुप रहना है ,उसके बाद देखा जायेगा -क़ानून जो है -सात साल के बाद दहेज़ का कानून लागू नही होता "! वो सन्न रह गई !ये क्या कह है !लगा किसी ने पिघला शीशा डाल दिया हो !बना -उसकेबनाया सपनों का महल दह गया था और शशि मलबे में बिखरे सपनों को बीन रही थी जो जहाँ ठहा बिखरे पड़े थे और वो बेसुध होकर वहीं बेठ गई उस मलबे के ढ़ेर पर -अभी तो मैं प्रोबेशन पर हूँ ........
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